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Rajat Sharma's Blog | गैंग ऑफ लॉरेंस बिश्नोई: FBI ने कैसे पकड़ा?

 Published : Jul 10, 2026 04:19 pm IST,  Updated : Jul 10, 2026 04:19 pm IST

3 साल की तहकीकात के बाद लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, जग्गू भगवानपुरिया जैसे गिरोहों के अपराध को लेकर चार्जशीट में जो सबूत पेश किए गए हैं, वो चौंकाने वाले हैं और उन्हें सजा दिलाने के लिए काफी हैं। FBI चार्जशीट में एक-एक बात का सबूत है।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

हमारे देश की जेलों में बैठकर गैंगस्टर्स कैसे दूसरे देशों में सुपारी लेकर कत्ल करवाते हैं, हत्या की धमकियां देकर रंगदारी वसूलते हैं, ड्रग्स का कारोबार करते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अमेरिकी जांच एजेंसी FBI की चार्जशीट में मिलती है। तीन साल की तहकीकात के बाद लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, जग्गू भगवानपुरिया जैसे गिरोहों के अपराध को लेकर चार्जशीट में जो सबूत पेश किए गए हैं, वो चौंकाने वाले हैं और उन्हें सजा दिलाने के लिए काफी हैं। FBI चार्जशीट में एक-एक बात का सबूत है। FBI, लॉस एंजिलिस पुलिस और कनाडा की पुलिस ने अपने अंडरकवर एजेंट्स के जरिए लॉरेंस बिश्नोई और उसके गैंग के जुर्म के सबूत इकट्ठे किए, हत्या, ड्रग्स, अपहरण, वसूली जैसे जघन्य अपराधों के बारे में सबूत हासिल किए।

FBI ने कैलिफोर्निया की अदालत में लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांढा गिरोहों के खिलाफ तीन चार्जशीट्स फाइल की हैं। इनमें बताया गया कि कैसे FBI के एजेंट्स ने इन गैंग्स में एंट्री ली, मुजरिमों का भरोसा जीता, उनके साथ मिलकर काम किया और तीन साल में इनके खिलाफ सबूत जुटाए। FBI ने इस मामले में पंजाब पुलिस के एक इंस्पेक्टर को भी आरोपी बनाया है। इस इंस्पेक्टर को अब लाइन हाजिर कर दिया गया है।

सभी चार्जशीट्स पढ़ कर ऐसा लगता है, मानो FBI ने लॉरेंस बिश्नोई के साथ 'खोसला का घोसला' कर दिया। उसके गैंग्स में अपने एजेंट घुसाए, विश्वास जीता और पक्के सबूत हासिल किए। जो अपने आप को बड़ा oversmart समझता था, उसको double cross कर दिया। सवाल ये है कि लॉरेंस बिश्नोई का अब क्या होगा? उसके gangs के जो अपराधी भारत की जेलों में बंद हैं, अमेरिका की अदालत में file की गई चार्जशीट से उनका क्या बिगड़ेगा?

दरअसल अमेरिका की जांच एजेंसियां अब लॉरेंस बिश्नोई और उसके नेटवर्क के सदस्यों को extradite करने की मांग करेगी। इस गैंग से जुड़े एक-एक अपराधी की सारी प्रापर्टी जब्त कर ली जाएगी। FBI का कहना है कि एक बार ये गैंगस्टर्स अमेरिका की जेल में पहुंच गए, तो फिर जेल में रहकर रंगदारी वसूलना भूल जाएंगे।

अमेरिका ईरान के दलदल से कैसे निकलेगा?

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई को उनके पुश्तैनी शहर मशहद में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उन्हें इमाम रज़ा के मकबरे के पास दफ़नाया  गया। जनाज़े में लाखों लोग शामिल हुए। मशहद की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं थी। ख़ामेनेई 28 फरवरी को इज़राइली हमले में मारे गए थे। ईरान की सरकार ने दावा किया कि पिछले पांच दिनों में ख़ामेनेई के जनाज़े में दो करोड़ 37 लाख से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। ख़ामेनेई को दफ़्न करने से पहले ईरान ने पहली बार उनके उस घर की फुटेज रिलीज़ की है जहां पर 28 फरवरी को हुए हमले में ख़ामेनेई मारे गए थे।

इस हमले में ख़ामेनेई के अलावा उनके बेटे मुज्तबा की बीवी और पोतों की मौत हो गई थी। इस हमले में मौजूदा सुप्रीम लीडर मुज्तबा ख़ामेनेई गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गए थे और वो आज तक दुनिया के सामने नहीं आए हैं। खामेनेई की मौत से पहले फरवरी तक ये लगता था कि ईरान में पब्लिक का एक बड़ा वर्ग हुकूमत से नाराज़ है। तेहरान और कई शहरों में प्रदर्शन भी हुए थे। अमेरिका को लगा था कि खामेनेई को खत्म करने से ईरान के लोग खुश होंगे लेकिन जिस तरह से खामेनेई और उनके परिवार का खात्मा किया गया, उसने ईरान की अवाम को अमेरिका के खिलाफ एकजुट कर दिया।

खामेनेई की मौत को हुए चार महीने से ज्यादा हो गए है। इस दौरान अमेरिका की बमबारी ने ईरान को तबाह करके रख दिया लेकिन खामेनेई के जनाज़े में लोगों की भारी भीड़ ने साबित कर दिया कि लोग अपने रहबर को भूले नहीं हैं। अब एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि जिंदा खामेनेई अमेरिका के लिए फायदे का सौदा था। उन्हें मारकर भी अमेरिका ईरान पर कब्जा नहीं कर सका। जंग पर अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च किए, सो अलग। हमारे यहां इसे कहते हैं, “माया मिली न राम।”

ईरान से अमेरिका की तकरार अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। ईरान भी जानता है कि यही अमेरिका की कमजोर नस है। अमेरिका को इस बात का एहसास तो है कि ईरान पर बिना पूरी तैयारी के, बिना पूरी इंटेलिजेंस के, हमला करना गलती थी लेकिन आखिरकार अमेरिका सुपरपावर है, वह ईरान से हार स्वीकार नहीं कर सकता, इसीलिए ceasefire और deal का रास्ता निकाला गया है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि ईरान ने बार-बार पीछे हटकर ट्रंप को काफी परेशान कर दिया है और इसका नतीजा कुछ भी हो सकता है।

अयोध्या: जांच जल्द पूरी हो, नई व्यवस्था लागू हो

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरि ने कहा है कि उन्होंने चढ़ावे की गिनती की सारी व्यवस्था अब दुरुस्त कर ली गई है और मंदिर की व्यवस्था में जो कमियां थी, उन्हें दूर कर दिया गया है। अब किसी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं हैं। गोविन्द देव गिरि ने कहा कि वो करोड़ों रामभक्तों को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि जो गलती हुई वो भविष्य में दोबारा कभी नहीं होगी।

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को VVIP पास बनाने के जो अधिकार दिये गये थे, उन्हें वापस ले लिये गये हैं। इन लोगों की Mail IDs को बंद कर दिया गया है। अब ट्रस्ट के कामों के लिए खर्चे की अनुमति ट्रस्ट के नए कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन देंगे। बैंक से पैसा निकालने के लिए कृष्ण मोहन और चार्टर्ड एकाउंटेंट चंदन रॉय के काउंटर साइन ज़रूरी होंगे। चढ़ावे की गिनती में लगा पूरा स्टाफ बदल दिया गया है।

चढ़ावा चोरी केस की जांच भी तेजी से आगे बढ़ रही है। आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय के कब्जे से कुछ और रकम बरामद की गई है। प्रभु राम के प्रति भक्तों में कितनी अटूट श्रद्धा है, वहां आने वालों की संख्या में कमी न आना इसका प्रमाण है। दान की राशि में कमी आई है। ये मंदिर में व्यवस्था के प्रति भक्तों का अविश्वास है। अगर इस विश्वास को लौटाना है, आहत भावनाओं पर मरहम लगाना है, तो दो काम जरूरी हैं। एक, राम मंदिर के दानपात्रों में चोरी की जो जांच चल रही है, उसे जल्द से जल्द पूरी की जाए, दूसरा, मंदिर में जो नई व्यवस्था बनाई जानी है, उसमें देर नहीं होनी चाहिए।  (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 09 जुलाई, 2026 का पूरा एपिसोड

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